आठवे श्री मनोहर सिंह यादव स्मृति ‘सृजन श्री अलंकरण’ – 2026
पत्रांक: 16/ क21/524 | दिनांक: 10/05/2026
विषय: “अनबुझी-सी” (सृजन परंपरा गीत की प्रतियोगिता)
🏆 प्रतियोगिता के परिणाम (विजेता सूची)
| स्थान | कोड | रचना / रचनाकार |
|---|---|---|
| प्रथम 🥇 | 10 | मर्त्य बनकर भटकते — डाॅ० प्रियंका दुबे ‘प्रबोधिनी’ |
| द्वितीय 🥈 | 14 | जब बनाकार है मिटाता — कुमार गौरव |
| तृतीय 🥉 | 05 | युग – युगांतर से मुझको — परमानंद मिश्र |
| चतुर्थ | 06 | छा रहे मन के गगन — भरत नायक ‘बाबूजी’ |
| पंचम | 09 | पावस ऋतु बरसी भी — शिखा गर्ग |
🏆 विजेता सूची (शीर्ष 3 स्थान)
🥇 प्रथम स्थान
रचना: “मर्त्य बनकर भटकते” (कोड 10)
रचनाकार: डॉ० प्रियंका दुबे ‘प्रबोधिनी’
स्थान: गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
मर्त्य बनकर भटकते अरण्यक डगर ‘अनबुझी-सी’ पहेली सियाराम हैं।
काटते जो सहज ही जगत फंद को, बॅंध वचन में चलें वो विपिन धाम हैं।।
🥈 द्वितीय स्थान
रचना: “जब बनाकर है मिटाता” (कोड 14)
रचनाकार: कुमार गौरव
स्थान: धौलपुर, राजस्थान
जब बनाकर है मिटाता प्रीत का विन्यास कोई
कोसती है बस अधर को अनबुझी सी प्यास कोई
🥉 तृतीय स्थान
रचना: “युग युगांतर से मुझको” (कोड 05)
रचनाकार: परमानंद मिश्र
स्थान: कुशीनगर, उत्तर प्रदेश
युग – युगान्तर से मुझको ये अहसास है, प्रेम – पावन तुम्हारा सदा पास है
बीत जायें न मधुरिम प्रणय के प्रहर, अनबुझी – सी मिलन की अभी प्यास